
गुरुवर के दरवाजे देखो कैसा लगा नजारा है।
गुरुभक्ति के कारण ही तो हमको मिला सहारा है॥
महावीर को इन आँखों से हम तो देख नहीं पाये।
इन्हे देखकर लगता जैसे हमने उन्हे निहारा है॥
कवि राजेश चेतन की हास्य व्यंग और विचार कविता की चौपाल में आपका स्वागत है। देखने के लिए यहाँ क्लिक करें https://twitter.com/rajeshchetan http://kavitakosh.org/kk/राजेश_चेतन
1 comment:
बहुत बढिया ...
Post a Comment