Tuesday, March 25, 2008

जो तन के साथ मन को ना रंगे होली नहीं होती

दिनांक 22 मार्च 08 को पुष्पांजलि रेजीडेन्ट वेलफेयर की ओर से शिव शक्ति मन्दिर में राजेश चेतन के संचालन में एक कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस समारोह में अतिथि के रूप में विधायक डा॰ एस सी वत्स, पार्षद श्रीमती उषा गुप्ता, भाजपा नेता श्री श्याम लाल उपस्थित थे। इस समारोह को सफल बनाने में डा॰ हरी ओम का प्रयास सराहनीय रहा।


बिना दुल्हन कहारों से कभी डोली नहीं होती,
जो पत्थर को ना पिघला दे तो वो बोली नहीं होती।
हजारों गीत गा लेना हजारों रंग भर लेना,
जो तन के साथ मन को ना रंगे होली नहीं होती॥
मनोज कुमार ‘मनोज’, मेरठ




जमाने को उनसे हुआ प्यार देखो
गधों के गले में पड़े हार देखो
घोड़ों को मिलती नहीं घास देखो
गधे खा रहे हैं च्यवनप्रास देखो
ओम प्रकाश आदित्य, दिल्ली




तार से तार हम दिल के यूं जोड़ दें
दुश्मनी को भी हम प्यार का मोड़ दें
आज है कल न हो, पल की किसको खबर
जो हुआ सो हुआ सोचना छोड़ दें
ॠतु गोयल, दिल्ली




खौलता हुआ रगों में राणा व शिवाजी वाला
लहू का उफान कभी चुकने न पायेगा।
पन्नाधाय, हाड़ारानी का ये बलिदानी देश
कुर्बानी में कलेजा दुखने न पायेगा॥
शेखर, सुभाष, अशफाक की धरा है
यहाँ क्रान्ति का प्रवाह कभी रुकने न पायेगा।
सौ करोड़ जनता के दिल में लहरता
ये लाड़ला तिरंगा कभी झुकने न पायेगा॥
डा॰ अर्जुन शिशौदिया, गुलावटी, बुलंदशहर


जब से हम करने लगे बात-बात में जंग
तब से फीके हो गए त्यौहारों के रंग
धुँआ-धुँआ सा हो गया दीपों का त्यौहार
शोर-शराबा बन गया होली का हुडदंग
चिराग जैन, दिल्ली





पड़ोसन के गाल पे, जैसे मला गुलाल
बीवी का रंग हो गया, कुछ पीला कुछ लाल
राजेश चेतन, दिल्ली

इस समारोह में कवि श्री यूसुफ भारद्वाज व श्री कृष्णकांत मधुर ने भी काव्य पाठ किया।
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