Tuesday, March 25, 2008

एक दीया तो जलाओ किसी के लिए

दिनांक 21 मार्च 08 को सत्संग समिति, दीपाली की ओर से होली के अवसर पर एक कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसका संचालन कवि राजेश चेतन ने किया। उपस्थित कवियों ने देर रात तक श्रोताओं को बांधे रखा


कुछ तो करके दिखाओ किसी के लिए
हाथ गम से मिलाओ किसी के लिए
घर तुम्हारा उजालों से भर जाएगा
एक दीया तो जलाओ किसी के लिए
महेन्द्र शर्मा, दिल्ली


सत्ता की दलाली फले, गोरी गोरी जूतियों से
दफ्तरों में चांदी वाली चलती है जूतियां
मुर्गियां फंसती है जूतियों को देखकर
मछलियां आजकल तलती है जूतियां
नेता जी चुनाव जीत आए तो नेताइन बोली
इनको तो वोटरों की फलती है जूतियां
संसद से लौटे इक पत्रकार ने बताया
आजकल वहां भी तो चलती है जूतियां
योगेन्द्र मौदगिल, पानीपत


मार दे ऐसी प्रेम की पिचकार होली में
घृणा घटे – घटे नहीं लेकिन प्यार होली में
गैंदा जूही गुलाब खिला कचनार होली में
तू भी हंसता हुआ सुमन बन जा यार होली में
सत्यदेव हरियाणवी, दिल्ली




वोटों के ये प्यारे-प्यारे गुच्छे लूटने के लिए,
दिल है कि तुम्हें वोट-बेल में लगा दूं मैं।
मनमोहना यूं बोले – आज्ञा हो तो आपकी
यह गद्दी अल्पसंख्यकों के खेल में लगा दूं मैं।
लालू बोले – इन्हीं वोटों के भरोसे ही तो सोचा –
पूरे इंडिया को फ्री में रोल में बिठा दूं मैं।
वित्तमंत्री जी बोले – बजट लूटा दिया है,
चाहो तो यह पूरा देश सेल में लगा दूं मैं।
अशोक बत्रा, सोनीपत


जेबकतरे का बेटा बोला,
हे ईश्वर, नहीं मांगता आपसे
कोठी, बंगला, महल, किले
ना इंग्लैंड में, ना फ्रांस में, ना इटली में
मुझे तो बस हर जन्म भारत में ही मिले
बाप बोला मैं धन्य हुआ,
जो जेबकतरे का बेटा होकर भी
तेरी रगों में देशभक्ति का रक्त बहता है
बेटा बोला, ये बात नहीं है पापा
वहां ठंड इतनी ज्यादा है कि
लोगों का हाथ अपनी जेब में ही रहता हैं।
रसिक गुप्ता, दिल्ली


एक जनवरी चकाचौंध में विक्रम संवत भूला दिया है
नहीं जानते निज का गौरव हमने सब कुछ लूटा दिया है
राजेश चेतन, दि्ल्ली
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