
इंसान यदि चाहे तो एवरेस्ट पे भी जा सकता है
अपनी भक्ति से मानव भगवान को भी पा सकता है
ग्रहण कहे कि तुम अपने बडप्पन पे ना इतराओ
चांद भी कुछ समय के लिए सूरज को छुपा सकता है
रसिक गुप्ता, दिल्ली

तन में तरंग उठी उस में उमंग उठी
नेह की छुअन अंग-अंग में समायी है
लगती सुहानी रात प्रात करती है बात
सुध-बुध खोयी ऐसी मुरली बजायी है
मधु मोहिनी उपाध्याय, नोएडा

शक्ति भक्ति की विजय पताका दुनियां में लहराते
तीज और त्यौहार पे घर आंगन सदा सजाते
होली दीवाली दशहरा का त्यौहार मनाते
भारत की माटी से महके जिनके तन मन प्रान
मन में अमृत जल कल-कल गंगा मां का वरदान
धड़कता प्यारा हिन्दुस्तान, हर भारत वंशी के दिल में धड़के हिन्दुस्तान
गजेन्द्र सोलंकी, दिल्ली
आपका दर्द मिटाने का हुनर रखते हैं
जेब खाली है, ख़जाने का हुनर रखते हैं
अपनी आँखों में भले, आसुओं का सागर हो
मगर जहां को हंसाने का हुनर रखते हैं।
डा॰ सुनील जोगी, दिल्ली

कोई जाति कोई पंथ विशेष नहीं
प्रांतवाद का भी कोई परिवेश नहीं
राज ठाकरे को जाकर ये समझाओ
मुंबई भारत का हिस्सा है देश नहीं
राजेश चेतन, दिल्ली

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