Tuesday, February 5, 2008

नरेला कवि सम्मेलन

दिनांक 05 फरवरी 2008 को नरेला में एक कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कवि सम्मेलन में उपस्थित कवियों ने अपनी कविताएं कुछ यूं प्रस्तुत की -


यूनियन जैक को कंपाने वाले क्रान्तिवीर,
मंगल पाण्डे की वो कहानी याद कीजिए
ब्रिटिश को आइना दिखाने वाले कुँवर सिंह
अस्सी साल वाली वो जवानी याद कीजिए
बहादुर शाह, नाना साहब या तात्या टोपे
झाँसी वाली रानी मर्दानी याद कीजिए
सन अट्ठारह सौ सत्तावन वाली क्रान्ति हेतु
हुए जो शहीद बलिदानी याद कीजिए
गजेन्द्र सोलंकी, दिल्ली


नाम बता दूँ आपको, तो काफ़िर कहेगें लोग
यह कौन रखता है याद, मुझें देखने के बाद
कि मैं जात नहीं, धर्म नहीं, एक इन्सान हूँ
साम्प्रदायिकता के ऊपर,राष्ट्रीयता की पहचान हूँ
यूसुफ भारद्वाज, दिल्ली



धब्बे राजनीति में काले नजर आने लगे
हो भले भोले हमें भाले नजर आने लगे
पाप की भांति प्रदूषण इस कदर है बढ़ रहा
नदियों नहरों में हमें नाले नजर आने लगे
रसिक गुप्ता, दिल्ली




वोटों का भिखारी राजनीति का खिलाड़ी है जो,
पांच साल बाद आता नहीं शर्माता है।
कुर्सी से प्रीति घनी कुर्सी ही प्रेयसी भी,
कुर्सी विधाता है।
अतिशय कृतघ्न भी वो उसमें ही छेद करें,
थाली यजमान वाली जिसमें वो खाता है।
वोटों का भिखारी ढीठ सबको बताए मीत,
वोट पाते ही न जाने कहाँ भाग जाता है।
प्रभाकर त्रिपाठी



भ्रष्टाचारियों के कारण जब
जग भारत पर हंसता है,
वातावरण देखकर मुझको
आग उगलना पड़ता है।
राजेश चेतन, दिल्ली
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