Tuesday, January 29, 2008

प्रहलाद

घर घर में  हिरण्याकश्यप हैकैसे प्रहलाद बचाओगे 
हिरण्याकश्यप कब तक लेंगे अग्नि परीक्षा प्रहलादों की
अग्नि परीक्षा कब तक होगी सीता माँ के सन्तापों की
द्रोण अगूंठा एकलव्य को कब तक और काटना होगा
कब तक राम भेजकर वन में रावण हमें मारना होगा
दरबारों में सती द्रोपदी कब तक चीर हरण करने है
लाक्षागृह में कब तक पांडव हमको आज दफन करने है
कितनी पदमनियों के जौहर फिर से हमें देखने होंगे
ओर शहीदों की लाशों पर कब तक हाथ सेकने होंगे
कदम कदम अग्नि परीक्षा कैसे जान छुड़ाओगे
घर घर में  हिरण्याकश्यप हैकैसे प्रहलाद बचाओगे !!1!!

अपने घर की दीवारों को हमने देश समझ रखा है
अपने घर की खुशियों को पूरा परिवेश समझ रखा है
पास पड़ोस की गर्म हवायें हमको गर्म नहीं लगती है
उग्रवाद की रक्त होलिका हमको शर्म नहीं लगती है
घर की ईंट बचाने हेतु गालियों के पत्थर न्यौछावर
भगत सिंह हो बालक अपना हमको ये स्वीकार नहीं है
वीर शिवा की गौरव गाथा अब शिक्षा का सार नहीं है
आचरणों में परिवर्तन की जो ना अलख जगाओगे
घर घर में  हिरण्याकश्यप हैकैसे प्रहलाद बचाओगे !!2!!

आज़ादी हम जिसको कहते आधी और अधूरी लगती
लोकव्यवस्था जिसको कहते भारत की मज़बूरी लगती
कब तक हमको मंडी जैसे नेताओं को चुनना होगा
कब तक अपनी इस हालत पर हमको यूं फिर घुनना होगा
जाति भाषा धर्म प्रान्त ही हमको आज बड़े लगते है
राष्ट्र प्रेम के अराधक फिर हमको बौने ही दिखते है
चाणक्य की चीत्कार क्या हमको आज सुनाई देती 
पास पडोसी शकुनि चालें हमको नहीं दिखाई देती 
राष्ट्र देव को मन मंदिर में जब तक नहीं सजाओगे
घर घर में  हिरण्याकश्यप हैकैसे प्रहलाद बचाओगे !!3!!

देश भक्ति के रंगों से ये होली हमें खेलनी होगी
कश्मीर की केसर हमको घर घर आज भेजनी होगी
जाति भाषा धर्म प्रान्त की दीवारों को तोड़ गिराओ
रंगों की इस कीचड़ में से मन मंदिर के कमल खिलाओ
रंग अबीर गुलाल छोडिये माटी अपनी ही चन्दन है
इस माटी के तिलक लगाकर सबको होली अभिनन्दन है
कच्चे कच्चे नहीं चाहिये पक्के रंग से खेले होली
देश प्रेम के मतवालों की कदम कदम पर होगी टोली
इसी सूत्र से जो भारत में होली नहीं मनाओगे
घर घर में  हिरण्याकश्यप हैकैसे प्रहलाद बचाओगे !!4!!
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