Monday, January 14, 2008

होली के रंग, कवियों के संग



नफ़रत की होली जला, खेल प्यार का फ़ाग
उपर उठ हर भेद से, नई भोर में जाग

राम करे घर घर छ्ने,ये होली की भंग
चढ कर फिर उतरे नहीं, ये होली के रंग

-नरेश शांडिल्य



तूं गुलाल मेरा मैं रोली तेरी
तूं कहार मेरा मैं डोली तेरी
तूं आंगन मेरा मैं रंगोली तेरी
तूं मेरा फाग है मैं होली तेरी

-ॠतु गोयल


भले होली कहो या तुम कहो त्योहार रंगों का
है सबके वास्ते सबसे हंसी उपहार रंगों का
बिना रंगों के दुनिया में सभी सपनें अधूरे हैं
सभी की जिन्दगी को चाहिये आधार रंगों का

-दिनेश रघुवंशी


देश भक्ति के रंगों से ये होली हमें खेलनी होगी
काश्मीर की केसर मित्रों घर घर आज भेजनी होगी
जाति भाषा मझह्ब की दिवारों को तोड गिराओ
रंगों की इस कीचड में से मन मंदिर के कमल खिलाओ
रंग अबीर गुलाल छोडिये माटी अपनी ही चंदन है
इस माटी के तिलक लगाकर सबको होली अभिनन्दन है

-राजेश चेतन


झूम रहा संसार फाग की मस्ती में
रंगों की बोछार फाग की मस्ती में
जाने कैसी भांग पिला दी साली ने
बीबी दिखे चार फाग की मस्ती में

-योगेन्द्र मोदगिल्य
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