Monday, November 26, 2007

मुक्तक

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भूखी ये जनता रोटी से दूरी है
नंगा है तन कपड़ा जरूरी है
जनता की आंखों में जब तक हैं आंसू
आजादी समझो तब तक अधूरी है
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साजिशें चहुंओर दिखाई देती है
दिल्ली कुर्सी चोर दिखाई देती है
न्यायालय में सरकारी साजिश देखी
संसद भी कमजोर दिखाई देती है
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शत्रु सम्मुख डटे रहे और हार कभी ना मानी
आजादी के लिये दे गये जो अपनी कुरबानी
उनके चरणों में है शत शत वंदन नमन हमारा
आओ मिलकर गायें उनकी गाथाएँ बलिदानी
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संवेदनाये मर गई फिर से जगाओ
पड़ोस की झोपड़ी में भी दीप जलाओ
अहिंसा को दुनिया में लाना है तो
गरीब नहीं गरीबी मिटाओ
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खादी पहने घूम रहे मक्कारों को
कौम के दुश्मन वोट के ठेकेदारों को
राम की महिमा नहीं दिखाई दे जिनको
सेतु के उस पार करो गद्दारों को
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शत्रु सम्मुख डटे रहे और हार कभी ना मानी
आजादी के लिये दे गये जो अपनी कुरबानी
उनके चरणों में है शत शत वंदन नमन हमारा
आओ मिलकर गायें उनकी गाथाएँ बलिदानी
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देहरी उपर दीप जलाना अच्छा है
अन्धकार को दूर भगाना अच्छा है
बाहर लाखों दीप जले हैं जलने दो
भीतर मन का दीप जलाना अच्छा है
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प्यार मीरा प्यार राधा प्यार ही रसखान है
प्यार जिसको हो गया महकता इन्सान है
नफरतों को छोड़ बन्दे प्यार करना सीख ले
प्यार जिसने पा लिया तो पा लिया भगवान है
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दिल से दिल की बढ़ती जाती दूरी है
शादी है तो बंधन बड़ा जरूरी है
एक छत नीचे दोनों को रहना हो
गाये तो अपने भारत की मजबूरी है
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प्याऊ मंदिर विद्यालयों का जाल बिछाया
हरिजन गिरिजन सबको अपने गले लगाया
कुल देवी लक्ष्मी का वरदान मिला तो
पुण्य कमाई को हमने प्रसाद बनाया
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आरती सरस्वती माता की जिसको नहीं सुहाती है
भारत भू की गौरव गाथा जीभ नहीं गा पाती है
हो सकता है बहुत बड़ा हो पर भारत का भक्त नहीं
कलाकार उसको कहने में शर्म बहुत ही आती है
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जो कर गये शीश का दान
आओ दें उनको सम्मान
यमुना तट ये बोल रहा
भूल गये उनका बलिदान
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जिंदगी में दिन मिले बस चार हैं
कर रहें हम रोज ही व्यापार हैं
प्यार जिस दिन हो गया तो मानिये
जिंदगी में रोज ही त्यौहार हैं
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वो हमारे घर में जब से आ गये
सारी दुनिया की खुशी हम पा गये
जबसे हमने प्यार का सीखा सब
कहम दिलों की धड़कनों में छा गये
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प्यार में वो जाफरानी हो गई
इक मोहब्बत की कहानी हो गई
प्यार के रंग में रंगी तो देखिये
श्याम की मीरा दीवानी हो गई
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गुल के बदले मिल रहे अब खार है
जब से आँखें हो गई बस चार हैं
बोलते है हो गया है लव उन्हें
जिस्म से ही लोग करते प्यार हैं
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प्यार से मीठी ना कोई तान है
प्यार की होती नहीं दुकान है
नफरतों को छोड़ सब मिल कर कहें
प्यार ही तो इस धरा की शान है
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नदी का सागर में समाना समर्पण नहीं मजबूरी है
पेड़ का जमीन में गड़ जाना समर्पण नहीं मजबूरी है
ईश चरणों में मन लगा तो समर्पण जानो
मौत से रिश्ता निभाना समर्पण नहीं मजबूरी है
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धर्म दुकानों का जिसने प्रतिकार किया
वेदों को ही जीवन में स्वीकार किया
शत् शत् वन्दन ॠषि दयानन्द को करते
आर्य समाज को भारत में साकार किया
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नकली नकली ही सारा व्यवहार मिला
अंग्रेजी में सारा कारोबार मिला
विमानों में हिन्दी का सम्मान नहीं
सीट सीट पर अंग्रेजी अखबार मिला
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द्वेष की बढती लहर आरक्षण है
प्रतिभाओं पर बढता कहर आरक्षण है
नेताओं ने इस कदर बाटाँ है
समाज कोजातियों में बढता जहर आरक्षण है
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वोट बैंक का राग हमारे भारत में
खून हो गया फाग हो गया भारत में
कुर्सी वाले मिलकर देखो लगा रहे
आरक्षण की आग हमारे भारत में
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रोज दिये से जलते रहो
फूलों के सम खिलते रहो
दुनिया है घर के बाहर
जीना है तो मिलते रहो
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फुटपाथों पर रहने वाले दिल्ली में
जोर जोर से कहने वाले दिल्ली में
संसद की कैन्टीन अय्याशी में डूबी
भूखे ही सो जाने वाले दिल्ली में
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काव्य की सरिता सुहानी ला रहा
धर्मनगरी की कहानी गा रहा
कौन कहता है गया हूँ छोड़कर
मैं भिवानी गीत गाने आ रहा
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पावन परम चरित्र हमारे स्वामी जी
वनवासी के मित्र हमारे स्वामी जी
भारत माता मंदिर का निर्माण किया
राष्ट्र भक्ति का चित्र हमारे स्वामी जी
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बासन्ती आँखों में जीवन पाते हो
चोली वाले गीत झूम कर गाते हो
घायल माता प्यारे तुमसे पूछ रही
क्या बेटा होने का फर्ज निभाते हो
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टी वी चैनल का युग आया
सांसद तनिक नहीं शर्माया
जनता ने भी झूम झूम कर
बकरीद त्यौहार मनाया
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उँची उँची दुकानों पर फीके ही पकवान मिले
उँचे उँचे उद्योगों की नीवों में तूफान मिले
देख भाल के चलना मित्रों कदम कदम पर धोखा है
चौराहे पे राम से लड़ते हमको तो हनुमान मिले
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कैसे पूरा देश साथियों दिल्ली अन्दर आ सकता है
दिल्ली सिंहासन पर चढ़कर भारत देखा जा सकता है
अगर राम सी दृष्टि होती भारत के सब नेताओं की
बच्चा बच्चा अपने घर पर राजा का सुख पा सकता है
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माँ का सुमिरन कर रहा संसार है
माँ ही तो इस सृष्टि का आधार है
आ गया जो भी यहाँ दरबार में
उसका बेडा हो गया बस पार हैं
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सिध्दार्थ त्रिशला नन्दन महावीर
सुखदाई और दु:ख भंजन महावीर
जन्म दिवस की भारत भू पर धूम मची
शत शत वंदन अभिनंदन महावीर
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नवीन तुमने क्या नवीन काम किया है
घर घर को तुमने ही तिरंगा धाम किया है
जिंदल तुम्हारी जिंदादिली याद रहेगी
वनवासी तिरंगे को राजा राम किया है
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मन में सेवा भाव जगे क्या राज है
कानों में भारत माँ की आवाज है
औरों के कष्टों में आँखे गीली जब
समझो द्वारे अग्रसेन महाराज है
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कैसै कैसै मरते लोग
झूठी बातें करते लोग
दर्पण देख लिया होता
फिर खुद से ही डरते लोग
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मीरा और कबीर हो तुम
बुद्ध और महावीर हो तुम
ओशो तेरे रूप अनेक
कृष्ण की तस्वीर हो तुम
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जहाँ कहीं भी नई रोशनी छाई है
जहाँ कही भी जीवन की सच्चाई है
दुनिया वाले चाहे उसको धर्म कहे
सच कहता हूँ भारत की परछाई है
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आशा और विश्वास चाहिये
जीवन में मधुमास चाहिये
दिन गिनती करने से क्या है
पिया मिलन की प्यास चाहिये
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होती ध्यान योग परिचर्चा भारत है
नियोजन से होता खर्चा भारत है
कट्टरता को हमने कब स्वीकार किया
खुले रूप से ईश्वर अर्चा भारत है
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कभी कभी होती मुझको हैरानी है
कवियों की भी ये कैसी नादानी है
जापानी जूते के संग रूसी टोपी
बोल रहे हैं दिल तो हिन्दुस्तानी है
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हिन्दुस्तान के हम हैं मित्रों हिन्दी भाषी हैं
सत्य अहिंसा मानवता के हम विश्वासी हैं
राम कृष्ण गौतम के वंशज दुनिया वाले जाने
भारत शक्ति दिल में अपने हम प्रवासी हैं
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जुंबा भले लठमार हमारा हरियाणा
दिल में रहता प्यार हमारा हरियाणा
दूध दही की नदियां कल कल कहती हैं
रोज रोज त्यौहार हमारा हरियाणा
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राजनीति का तीर नही बिहार सखे
दु:ख पीडा तस्वीर नही बिहार सखे
बुद्ध और महावीर की धरती पावन ये
लालू की जागीर नही बिहार सखे
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मजदूरों की प्यारी नेता वृन्दा जी
बाबा के गल डाल दिया है फन्दा जी
मल्टीनेशन भी तो भारत में चमके
बन्द करो ये आयुर्वेद का धन्धा जी
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पंथ खालसा परम्परा का ध्यान रहे
गुरू भूमि इस भारत का सम्मान रहे
मान सोनिया का करना है भले करो
दिल में सबसे पहले हिन्दुस्तान रहे
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चेत बेसाखी प्यारे भाई अपनी है
वाईफ उनकी और लुगाई अपनी है
जनवरी फरवरी रट लेने से क्या होगा
ईयर न्यू अग्रेंज बधाई अपनी है
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नये साल में चंहु ओर खुशहाली हो
सबके घर में रोज रोज दीवाली हो
अटल बिहारी पथ पर कोई ना जाये
कुंआरों की भी शादी हो घरवाली हो
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रिश्वत देकर तुमने घर क्यूं बनवाया
भ्रष्टाचारी अफसर ने ये समझाया
न्यायालय की बातें बिल्कुल सच्ची है
इस कारण ही बुल्डोजर लेकर आया
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