Saturday, November 15, 2008

नोटतंत्र

काग्रेंस बसपा भाजपा सबकी उंची शान
लोकतंत्र मे आजकल सबकी है दुकान
सबकी है दुकान नोट की महिमा भारी
टिकट टिकट की मची हुई है मारामारी
कह चेतन कविराय ये कैसा लोकतंत्र है
लगता हम को अब भारत में नोटतंत्र है
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