Tuesday, July 8, 2008

नेट का जहर


एक जमाना था जब भारत में एक गली मोहल्ले में एक फ़ोन हुआ करता था । एस टी डी करने के लिये फ़ोन बूथ पर लम्बी लाईन लगती थी । आज दृश्य बदल गया है, ना बूथ है ना लाईन, एक अनुमान के अनुसार आज भारत में लगभग 25 करोड मोबाईल फ़ोन है । पिछ्ले 5 वर्षों से मोबाईल बूम भारत में दिखाई दे रहा है और मित्रों मेरा अनुमान है अगले पांच वर्षों में भारत में इसी प्रकार का इंटरनेट बूम दिखाई देगा । विश्व के विकसित देशों में नेट जीवन का आधार बनता जा रहा है, वास्तव में सूचना और ज्ञान का भंडार है इंटरनेट । हर चीज के दो पहलू होते हैं, कविवर उदय भानु हंस ने कहा है-

भला बुरा ना कोई रुप से कहलाता है,
कि दृष्टि भेद स्वयं दोष गुण दिखलाता है,
कोई कमल की कली देखता है कीचड़ में,
किसी को चांद में भी दाग नजर आता है ।


नेट एक ओर जहां जीवन का आधार बनता जा रहा है वहां दूसरी ओर युवा पीढी को जहर परोसने का कार्य भी नेट के माध्यम से सफ़लता पूर्वक किया जा रहा है । अश्लीलता का बडा करोबार चल रहा है इस नेट पर । पोर्न साइट देखने के लिये लोग रात भर चिपके रहते हैं नेट के साथ । छोटे-छोटे बच्चों को बहला फुसला कर अश्लील फिल्में बनाई जा रही हैं। भारत में डी पी एस स्कूल का एम एम एस कांड सदैव हमें याद रहेगा। अमेरिका में समाज का एक तथाकथित वर्ग पोर्नग्राफी में पूरी तरह से लिप्त है। एक अनुमान के अनुसार अमेरिका में दस से सतरह साल के तेरह बालकों मे से एक बालक इस गिरोह का शिकार होता है।
अश्लीलता के साथ-साथ नेट पर धोखाधड़ी के भी अनेक मामले प्रकाश में आये है, क्रेडिट कार्ड, शेयर्स, लाटरी इत्यादि के बहाने बड़े पैमाने पर साइबर अपराध का धन्धा भारत में चल रहा है। आज पुलिस को भी साइबर अपराध से जूझने के लिए अलग से विभाग बनाने की आवश्यकता पड़ गई है। अतः आवश्यकता है कि हम भारत में इन्टरनेट बूम आने से पूर्व सजग रहे और नेट पर परोसे जाने वाले जहर से युवा पीढ़ी को बचाए तथा सूचना प्रौद्योगिकी तथा ज्ञान के भण्डार के रूप में ही नेट का प्रयोग करें।
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