Thursday, May 15, 2008

जागरण अखबार और कवि सम्मेलन


करगिल युद्ध के समय संस्कार भारती दिल्ली ने "चुनौती है स्वीकार" नाम से एक कवि सम्मेलन का आयोजन किया था जिसमें तत्कालीन गृह मंत्री श्री लाल कृष्ण अडवाणी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस कवि सम्मेलन में जागरण समूह के मालिक श्री नरेन्द्र मोहन से मिलने का सौभाग्य मिला। कार्यक्रम का संयोजक होने के कारण मुझे उनके स्वागत का अवसर मिला। मंच पर उपस्थित श्री गोपाल कृष्ण अरोड़ा ने टिप्पणी की, एक कवि दूसरे का स्वागत कर रहा है। इससे पूर्व मैं उनको एक सांसद और जागरण समाचार पत्र के मालिक के रूप में ही जानता था। इस घटना के बाद श्री नरेन्द्र मोहन जी की कविताएं अक्सर पढ़ता रहा और उनकी रचनाओं से प्रभावित रहा। आज जब जागरण समूह को हिन्दी कविता और कवि सम्मेलन के लिए समर्पित देखता हूँ तो मुझे नरेन्द्र मोहन जी का वह कवि रूप याद आ जाता है। हिन्दी कवि सम्मेलन का जब भी इतिहास लिखा जाएगा तो हिन्दी कवि सम्मेलन को लोकप्रिय करने में जागरण समूह का योगदान जरूर याद किया जाएगा।
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