Monday, April 7, 2008

नये साल में

चेहरों पे इक मुस्कान मिले नये साल में
खिलता सा हिन्दुस्तान मिले नये साल में

महंगाई के इस दौर में चूल्हा सिसक रहा
रोटी तो ससम्मान मिले नये साल में

मुंबई के लोग राज धर्म भूल गये हैं
सदबुद्धि का वरदान मिले नये साल में

धरती के रोम-रोम को जो सींचता रहा
भूखा ना वो किसान मिले नये साल में

श्री राम जन्मभूमि पर निर्माण हो नया
खोया हुआ सम्मान मिले नये साल में

ये नफरतों औ' गोलियों का चलन बन्द हो
सुख शान्ति का जयगान मिले नये साल में

ईशा के तो यशगान में है पहली जनवरी
विक्रम का भी गुणगान मिले नये साल में
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