Tuesday, March 11, 2008

हंसराज कालेज कवि सम्मेलन


दिनांक 11 मार्च 08 को हंसराज कालेज, दिल्ली में एक कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। राजेश चेतन के संचालन में स्थानीय सभागार में उपस्थित श्रोताओं ने कवितओं का आनन्द लिया। उपस्थित कवियों ने अपने अपने तेवर से कविताएं प्रस्तुत की -

हम चंदन वन के आस पास रहते हैं
तुमको सापों से डर न लगे तो आ जाना
हम महाशांति के आस पास रहते हैं
घर के क्रंदन से भय न लगे तो आ जाना
असीम शुक्ल, गुडगांव




गुनगुन चुम्बन भाल पर, रोम रोम उजियार।
दोनों हाथ पसार ले, सूरज बांटे प्यार॥

सूरज उतरा झील में, खिल आयी मुस्कान।
लहर लहर सोना हुई, झील हुई धनवान॥
बलदेव वंशी, दिल्ली

रेखा देखा तेरा व्यास, कितना दूर कितना पास।
पास लगे वो उतना दूर, दूर लगे वो कितना पास॥

काम पड़े तो इक दूजे के, हो जाते वे खासमखास।
कहाँ मकां मुकां बनाएं, बेहतर है आँखों में वास॥
डा॰ रेखा व्यास, दिल्ली


रोशनी की इबादत करो
चाँदनी की इबादत करो
देवता बनना चाहो अगर
आदमी की इबादत करो
डा॰ श्याम निर्मम, गाजियाबाद




ओ गान्धारी
तुम मर ही नहीं सकती कभी
क्यूंकि इंद्रप्रस्थ, हस्तिनापुर, धृतराष्ट्र
दुर्योधन, शकुनि और तुम्हारे सारे पुत्र
जीवित हैं आज भी उसी तरह
वो पांडवों को उनका हक
विनाश हुए बिना कभी नहीं देंगें
तुम्हारी आंखों से मोह का परदा कभी उठ नहीं पाएगा
शकुनि जैसे भी हो चौसर की बिसात बिछाएगा
प्रभाकिरण जैन, दिल्ली


मेरे दोस्त
जब पहनने के लिए मिले रेशमी वस्त्र
खाने के लिए मिले लजीज गोश्त
नहाने के लिए मिले खुशबुदार साबुन
और सोने के लिए मिले आरामदेह बिस्तर
तो तय है कि साथ मिलेगा एक
खूबसूरत पट्टा जंजीर के साथ
अनीता वर्मा, दिल्ली


अंग्रेजो के पराधीन थे अपनो के आधीन है
यानि हम स्वतंत्र नही स्वाधीन है
राजेश चेतन, दिल्ली
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