Friday, February 29, 2008

फैशन

बालों में रबड़ बैण्ड, कानों में बाली, कमर तक शर्ट, उंची ऐडी का जूता, आजकल के लड़के फैशन के इस दौर में लड़की दिखना चाहते हैं। छोटे बाल, ना कोई बिन्दी, ना मांग में सिन्दूर, ना कोई गहना लड़कियां भी इस तरह लड़का दिखना चाहती हैं। फिल्में भारतीय फैशन का दर्पण है। नई पीढ़ी झांसी की रानी को जाने या ना जाने परन्तु रानी मुखर्जी को जरूर जानती है, शहीदों को जाने या ना जाने परन्तु शाहरुख को जरूर जानती है। बाजार के इस युग में भारतीय फिल्में जहां जा रही है फैशन भी उसका अनुसरण कर रहा है। फिल्मों में जहां नायिका का वस्त्र विन्यास लगातार सिकुड़ता जा रहा है तो नायक भी शर्ट के बटन खोले ठुमकता नजर आता है। क्या नग्नता को ही फैशन कहें। किसी व्यंग्यकार ने ठीक ही कहा है यदि नग्नता को फैशन कहा जायेगा तो भैंस तो इस दौड़ में प्रथम पुरस्कार ले जायेगी। फिल्मों के साथ-साथ छोटे पर्दे पर आने वाले चकाचौंध विज्ञापन भी नारी शरीर का प्रदर्शन करने में किसी से पीछे नहीं हैं। साबुन के विज्ञापन में तो फिर भी महिला को दिखाना समझ आता है परन्तु खैनी (चैनी चैनी) के विज्ञापन में महिला का नृत्य गले नहीं उतरा कि इस खैनी का महिलाओं से क्या रिश्ता हैं।

छोटे पर्दे का फैशन चैनल तो आज युवा पीढ़ी में सर्वाधिक लोकप्रिय है। इस फैशन चैनल पर भी अन्डर गारमेन्टस का प्रदर्शन कुछ ज्यादा ही दिखाया जाता है। पहनावा आपके व्यक्तित्व का दर्पण होता है। 'सादा जीवन उच्च विचार' भारत की संस्कृति का ध्येय वाक्य है, मैं यह नहीं कहता कि आज का युवा धोती कुर्ता पहनें, तिलक लगाएं परन्तु आज का युवक व युवती उस वस्त्र विन्यास का चुनाव करें जिसमें आप सुसंस्कृत व सभ्य दिखाई दें।

फैशन के अन्तर्गत केवल पहनावा ही नहीं आता आपका केश विन्यास से लेकर जूते चप्पल तक के विषय में इस पर चर्चा की जा सकती है। आज की पीढ़ी खाने में कम परन्तु अच्छा दिखने पर अधिक खर्च कर रही है। दिल्ली व मैट्रो नगरों में दुल्हन को सजाने के लिये एक हजार से एक लाख तक का पैकेज उपलब्ध है, शैलून ब्यूटी पार्लर की बाढ़ सी आ गई है, ब्यूटी उद्योग लगातार बढ़ता जा रहा है। विचार के प्रति हो या ना हो परन्तु सौन्दर्य के प्रति जागरुकता बढ़ती जा रही है।

अच्छा हो यदि हम फैशन के इस दौर में पश्चिम की नग्नता को छोड़कर फैशन का भी भारतीयकरण करें या डा॰ अशोक चक्रधर के कथनानुसार पश्चिम के वेस्ट के बजाए बेस्ट को स्वीकार करें तो फैशन के इस युग में भी सबसे आगे होगें हिन्दुस्तानी। और यदि कविता में कहूं तो

बड़े-बड़े हैं माल आजकल फैशन में
फिल्मों के बोल आजकल फैशन में
छोटे कपड़े और संग में छोटापन
चमक बड़ी अनमोल आजकल फैशन में
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