Wednesday, February 27, 2008

कोटा कवि सम्मेलन

भगवान चन्द्र प्रभु का जन्म कल्याणक राष्ट्र सन्त आचार्य शांति सागर जी के सान्निध्य में ॠद्धि सिद्धि नगर कोटा में आयोजित किया गया। इस अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन में राजेश चेतन के संचालन में कवियों ने काव्य पाठ किया -


वो मस्तियां वो खेल के दमखम गुज़र गये
वो लोरियां वो नींद के आलम गुज़र गये
परियों की कहानी सुनी नानी की ज़ुबानी
जाने कहाँ बचपन के वो मौसम गुज़र गये॥
गजेन्द्र सोलंकी, दिल्ली





इस तरह से उसकी याद सताती है
धूप जलाती है, रात रुलाती है।

याद में उसी की मन हुआ है पागल
आंख आंसूओं के छन्द सुनाती है।

हाल देखकर मेरा दीवानों सा
मेरी सखी मुझको पागल बताती है।
डा॰ मंजु दीक्षित, आगरा



पश्चिम की इस पुरवाई ने सारा खेल बिगाड़ा है,
संस्कार का आंचल कितना बेरहमी से फाड़ा है।
यही वजह है मासूमों के साथ हादसा होता है,
रोज़ निठारी में सुरेन्द्र रक्तपान कर सोता है।
मैं खूनी कोठी में बंद चीखों का दर्द सुनाता हूँ,
गीत नहीं मैं घायल भारत मां की धड़कन गाता हूँ।
शहनाज हिन्दुस्तानी, अजमेर


शेखर, सुभाष, अशफाक की धरा है
यहाँ क्रान्ति का प्रवाह कभी रुकने ना पायेगा।
सौ करोड़ जनता के दिल में लहरता ये
लाड़ला तिरंगा कभी झुकने ना पायेगा॥
डा॰ अर्जुन शिशौदिया, गाजियाबाद





संयम अपार और सादगी श्रंगार
हर मन मंदिर में ही घर कर लेती है,
करें स्वर साधना नमो अरिहंताणम
जन-जन मन भक्ति भाव भर देती है,
तन से पवित्र और मन से पवित्र मौन
मुनियों की पावनता मन हर लेती है,
जीओ और जीने दो की एकमात्र भावना ही
जैन मुनियों की जग में प्यार भर देती है॥
कलाम भारती, दिल्ली


कैसा अजब नजारा है
ये गुरुवर का द्वारा है
पांव छुए और काम हुए
कैसा गुरु हमारा है
राजेश चेतन, दिल्ली
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