Monday, February 18, 2008

गीता

मोह के कारण ना रही, बुद्धि तेरी शुद्ध
छोड मोह को ठान ले, करना तुमको युद्ध

इस काया को छोडकर, दूजी में प्रवेश
अजर अमर है आत्मा, मृत्यु नही विशेष

फ़ल की इच्छा मत करो, कर्म करो दिन रैन
जो भी इस मार्ग चला, मिला उसी को चैन

क्षणभंगुर ये सृष्टि है, मत कर सोच विचार
कर्म तत्व सबसे बडा, इसको ही स्वीकार

गृहस्थ धर्म स्वीकार कर, क्यूं लेता सन्यास
दु:ख के दिन कट जायेंगे, मन में रख विश्वास

जन्म मरण इस चक्र से, मुक्ति है आसान
दान दया तप यज्ञ, और सत्य धर्म सम्मान

प्रभु स्मरण बस कीजिये, प्रभु से करना प्यार
उसकी पूजा शीघ्र ही, होती है स्वीकार

अर्पित सब भगवान को, कर्म भक्ति या ज्ञान
मानव के उद्दार का, यही मन्त्र तू जान
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