Tuesday, January 15, 2008

जैन समाज शांति मोहल्ला का कवि सम्मेलन

दिनांक 14 जनवरी 2008 को जैन समाज शांति मोहल्ला द्वारा 48 दिवसीय भक्ताम्बर पाठ के समापन पर कवि श्री सौरभ जैन सुमन के संयोजन संचालन में एक कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। उपस्थित कवियों ने अपने उदगार कुछ यूं प्रकट किए -

कश्मीर छोड़ कर हम
न इधर में जायेंगे
न उधर में जायेंगे
कश्मीर तुझे दे देंगे
ऐ-मुशर्रफ, तो हनीमून
क्या हम तेरे घर में मनायेंगे
सबरस मुरसानी




नेताओं को हम मुफ्त में
जलाते हैं,
क्योंकि नब्बे पर्सेन्ट मुर्दे
तो इन्ही की कृपा से आते हैं।
जब किसी धर्म निरपेक्ष
नेता के कारण
धार्मिक उन्माद बढ़ जाता है
तो अपना धन्धा
एवरेस्ट चढ़ जाता है।
सर्वेश अस्थाना




आप बिन जिंदगी गरल हो गई
आप जो मिल गए तो सरल हो गई
आपने अपनी नजरों से मुझको पढ़ा
गुनगुनाया मुझे मैं ग़ज़ल हो गई
शालिनी सरगम





तेरे संग बीते पल कह रही हूँ
मैं ग़ज़ल हूँ ग़ज़ल कह रहू हूँ
जो भी गुजरी मोहब्बत में मुझ पर
मैं वही आजकल कह रही हूँ
प्रज्ञा 'विकास'





सोने और चांदी के गहने भी नहीं देखती मैं
इस क़दर क़ीमती कपड़े भी नहीं देखती मैं
अपने माँ बाप की आंखों से उड़ा दूं नींदे
इतने उलझे हुए सपने भी नहीं देखती मैं
खूशबु शर्मा





कब से भटके फिरे भवपार अगर मिल जाये
हम भी तर जायें तेरा प्यार अगर मिल जाये
ये तो दरिया है समन्दर भी पार कर लेंग़े
माँ के आशीष की पतवार अगर मिल जाये
अनामिका अम्बर




आचार्य मानतुंग का जो मान रखा आदीप्रभु
प्रार्थना ये करता हूं आपके चरण में
सत्य का पुजारी रहूं दीजिए आशीष मुझे
घूमता रहूं मैं चाहे नगर या वन में
भक्ताम्बर जी की रचना हुई तो देखो
ताले खुल खुल गिरे इक इक क्षण में
आपकी ये वन्दना का पाठ करूं रोज रोज
लीजिए मुझे भी प्रभु अपनी शरण में
राजेश चेतन
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