Thursday, January 17, 2008

ग्वालियर व्यापार मेला कवि सम्मेलन



ग्वालियर व्यापार मेला द्वारा कुसुमाकर रंगमंच पर आयोजित किए गए अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देश के प्रख्यात वरिष्ठ कवि गीतकार डा॰ कुंअर बेचैन की अध्यक्षता में देश के ख्यातिमान कवियों ने काव्यपाठ पर श्रोताओं की तालियाँ बटोरी।

कड़कड़ाती सर्दी में जहाँ वीररस के धुरंधर कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं का खून गर्म कर दिया, वही श्रृंगार रस के कवियों ने श्रृंगार की कविताओं से पूरे मंडप को रस से सराबोर कर दिया।

कवि सम्मेलन के शुभारंभ से पूर्व सभी कवियों का पुष्पहार से मेला अध्यक्ष अनुराग बंसल तथा अन्य पदाधिकारियों ने स्वागत सत्कार किया। सम्मेलन का संचालन गाजियाबाद के श्रृंगार रस के प्रख्यात कवि कुमार विश्वास ने किया। कवि सम्मेलन में देवास से पहुंचे वीर रस के कवि शशिकांत यादव 'शशि' ने रामसेतु पर अपनी कविता समर्पित की, जिसके बोल थे -

'आस्था का रामसेतु तोड़ने चले आप हैं
लगता है दिल्ली वाले मुगलों के बाप हैं।'

इस कविता पर पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज गया।

लखनऊ से पहुंचे हास्यकवि डा॰ सर्वेश अस्थाना ने पुलिस पर अपनी रचना पढ़ते हुए कहा -

'हमने पुलिस से पूछा महोदय बता सकते हैं ?
ये आतंकवादी किसे कहते हैं ?
वो बोला हत्या कर दो, पकड़े गए तो
अपराधी, वरना आतंकवादी।'


इस रचना पर श्रोताओं ने जमकर ठहाके लगाए। मैनपुरी के श्रृंगार रस के गीतकार बलराम श्रीवास्तव ने राम को वनवास पर कविता पढ़ते हुए ये पंक्तियाँ समर्पित की -

'आस्था का अवध पास हो जाएगा।
सत्य का जिसको आभास हो जाएगा।
तन की कैकेयी में मन हुआ मंथरा,
तो राम को फिर से वनवास हो जाएगा।'


जौरा के कवि तेजनारायण ने हास्य-व्यंग्य की फुहारें छोड़ते हुए ये पंक्तियाँ पढ़ी तो लोग देर तक गुदगुदाते रहे -

'मंच जब से अर्थदायक हो गए।
तोतले भी गीत गायक हो गए।
राजनीतिक मूल्य कुछ ऐसे गिरे,
जेब कतरे तक विधायक हो गए।'


मथुरा के श्रृंगार रस गीत गज़ल के विराट कवि डा॰ हिमांशु चतुर्वेदी ने अपनी रचना से मंच की शोभा में चार चाँद लगा दिए। इनकी पंक्तियाँ कुछ इस प्रकार रही -

'सुनो सुनहरे कल की खातिर
एक मुनादी लाए हैं।
आदमखोर भेड़िए कलफ लगी खादी में
आए हैं।'


दिल्ली के कवि राजेश चेतन ने अपनी इस रचना पर खूब वाहवाही लूटी -

'लोकशाही बेजुबानी हो गई
मुशर्रफ की मेहरबानी हो गई
आतंक की गोली चली और देखिए
बेगम भुट्टो एक कहानी हो गई'


आगरा से पहुंची कवयित्री डा॰ मंजू दीक्षित ने वीर रस की ये कविता पढ़ी -

'धीर वीर फौजियों को, भारती बुलाती आज'

सम्मेलन का संचालन कर रहे श्रृंगार रस के धनी कवि कुमार विश्वास ने अपनी कविता पढ़ी तो नवयुवा उछल पड़े।
भोपाल से पहुंची श्रृंगार की कवयित्री ने जैसे ही ये पंक्तियाँ पढ़ी तो पूरा मंडप कह उठा, क्या बात है, वाह वाह।

'इस तरह से आप मुझे मत देखिए
भाव सूची नहीं हूँ मैं बाजार की
मेरी हर सांस में इक उपन्यास है
कोई कतरन नहीं हूँ मैं अखबार की'


वीर रस के इस राष्ट्र को स्वर्णिम हस्ताक्षर ओजस्वी कवि विनीत चौहान ने रक्त में उबाल ला दिया। भोपाल से वीर रस के कवि चौधरी मदनमोहन समर ने अपनी कविता से समां बांध दिया। सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे गाजियाबाद के वरिष्ठ कवि डा॰ कुंअर बेचैन ने गालब भूमि को समर्पित रचना पेश की। अखिल भारतीय कवि सम्मेलन के पूर्व ग्वालियर व्यापार मेला द्वारा शहर के वरिष्ठ साहित्यकार कवि रामरज शर्मा 'पकिल' का सम्मान किया गया।

मेला अध्यक्ष अनुराग बंसल, वरिष्ठ कवि डा॰ कुंअर बेचैन तथा सांस्कृतिक समिति संयोजक डा॰ हरिमोहन पुरोहित ने शाल, श्रीफल तथा सम्मान पत्र प्रदान कर श्री पंकिल का सम्मान किया।

इस अवसर पर पंकिल की पुस्तक 'पंकिल समग्र' का विमोचन किया गया। प्रशस्ति पत्र का वाचन डा॰ भगवान स्वरूप चैतन्य ने किया। इस अवसर पर जौरा के कवि तेजनारायण शर्मा 'बेचैन' की पुस्तक 'कुछ पल जीते, कुछ पल हारे' का विमोचन डा॰ बेचैन ने किया।

साभार : नई दुनिया, रविवार 13 जनवरी 2008
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