Saturday, December 29, 2007

प्रज्ञा टी वी पर कवि सम्मेलन


सिखा गया नव वर्ष फिर, जीवन के कुछ पाठ।
खुशियों की सौगात ले, अब आया सन आठ॥
न हो जीवन में क्रंदन,खुशी का हो अभिनन्दन।
प्रेम शान्ति के सुर यहाँ, गूँजें सुबहो शाम।
घटे नहीं नव वर्ष में, कोई नन्दी ग्राम॥
न हो हिंसा का मंज़र,चले न कोई खंज़र।
गजेन्द्र सोलंकी

वर्ष 2008
आपको खुशियां मिलें 1460
1640 बोले तो,365 दिन, 4 पहर
365 X 4 के ठाठ,यानि सन 2008
सनते ही गजेन्द्र बोला,यार तेरी बात नहीं क्लीयर
2008 तो लीप ईयर है,
मैं बोला भाई, ऐसा साल किसको खलेगा
365 दिन खुशी के हों,तो एक दिन दुख का भी चलेगा
राकेश सोनी

नए साल में हो नया,
जीवन का उत्कर्ष
नवल-धवल उत्थान दे,
मंगलमय नव वर्ष
चिराग जैन



तुम्हारे साथ बैठे और समय का यूज हो जाए
तुम्हें देखें कि चाहें दिल बहुत क्नफ्यूज हो जाए
हमारी हर कहानी हर जगह सुर्खी बने दिलबर
कभी हम-तुम मिलें ऐसे कि ब्रेकिंग न्यूज हो जाए
शम्भु शिखर



मुशर्रफ की मेहरबानी हो गई
लोकशाही बेजुबानी हो गई
आतंक की गोली चली और देखिए
बेगम भुट्टो इक कहानी हो गई
राजेश चेतन
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