Thursday, October 29, 2009

दो प्याले हाथ में थामे हुए हैं जिंदगी..





कानपुर, संवाददाता : दो प्याले हाथ में थामें हुए हैं जिंदगी, एक में आबे जमजम, एक में गंगा का जल। गंगा और आबे जमजम की तुलना कर कवि जावेद गोंडवी ने बुधवार को लोगों से गंगा को प्रदूषण मुक्त रखने का संदेश किया। मौका था मानस मंच के तत्वावधान में चल रहे राष्ट्रीय रामायण मेला में कवि सम्मेलन का। कवियों को सम्मानित भी किया गया। मानस पार्क काकादेव में आयोजित सम्मेलन में माहेश्वर तिवारी ने मेरे भीतर एक उमंग जगाता है कोई, बतियाता है हल्के सुर में उठती जैसे ध्वनि नुपूर में अंग-अंग में बैठा मेरे गाता है कोई सुनाकर तालियां बटोरीं। कमलेश शर्मा ने भारत का कण-कण साक्षी है, अंसार कंबरी ने वो जनम जनम से उदास हैं, मेरे जैसी उसकी भी प्यास है मेरी आत्मा है अजर-अमर मेरा जिस्म एक लिबास है सुनाया। मृदुल तिवारी ने इससे पहले कि घात हो जाये, सारा घर एक साथ हो जाये, कोई गुलशन है, कोई सहारा, जैसी फितरत है वैसा चेहरा सुनाया। कवि अरुण जैमिनी, डॉ. सुरेश अवस्थी, गिरिजेश दीक्षित, संतोष सावन, अशोक बाजपेयी, उत्कर्ष अवस्थी, शैलेंद्र शुक्ल ने भी रचनाओं से गुदगुदाया। आरसी शर्मा द्वारा माहेश्वर तिवारी को फूलचंद्र शर्मा स्मृति, अशोक आहूजा द्वारा अरुण जैमिनी को लाला बालक आहूजा स्मृति, डॉ. आर सहाय द्वारा राजेश चेतन को विशाल सहाय स्मृति, उमेश मिश्र द्वारा लोकेश शुक्ल को रामसहाय मिश्र स्मृति सम्मान दिया गया। मुख्य अतिथि रामनाथ महेंद्र थे, अध्यक्षता केए दुबे पद्मेश ने की।
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