Sunday, July 5, 2009

विश्व विख्यात श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव पंजाबी बाग भूमि पूजन समारोह के अवसर पर हास्य कवि सम्मेलन

कृष्ण जन्माष्टमी भूमि पूजन के शुभ अवसर पर:-




"सब जानते है घड़ा पाप का भरा है पर
फिर भी किसी की कोई यहाँ नहीं मानता
स्वार्थ पूरा हो जाए तो मिलने के बाद
अगले ही पल किसी को कोई ना पहचानता
श्याम रुकमणी के संग महलों में रहता था
फिर भी वो नजरों में राधा की महान था
सच्चा प्रेम राधा का था इसलिये राधा
संग श्याम जुड़े राधेश्याम को ही जगजानता।"
'शहनाज हिन्दुस्तानी'




पिताजी बोले कोई नहीं जानता क्या होगा अगले पल
फिर भाग्य और भविष्य कैसे बता सकता है राशिफल
तबसे मैं यह मानता हूँ कि भाग्य उसी का उज्जवल
होता है, कर्म करने की शक्ति जिसके पास है
ये TARO, NUMEROLOGY राशिफल सब मिथ्या है बकवास है।
'दीपक सैनी'





वो जिनके नाम से भी तैरते पत्थर समुन्दर में
उन्हें ये ढूँढते फिरते यहाँ दुनिया के मन्जर में
तुम्हें मिल जाएगा हर प्रमाण जो भी देखना चाहो
भक्त हनुमान जैसा बन के देखो मन के अन्दर में
'अनिल गोयल'





एक नेता ने कहा कि जिससे सुलझना था
जाकर पतंग उससे उलझ गयी है
दूजे ने कहा कि जिससे उलझना था मुझे
होते-होते बात उससे सुलझ गयी है
किसी-किसी की यहाँ से उजड़ी है झोपड़ी तो
किसी-किसी की तो मुर्ति भी पुज गयी है
किसी-किसी का अंधेरे में भी तीर चल गया
किसी-किसी की तो लालटेन बुझ गयी है

'प्रवीण शुक्ल'


भेजा खुदा ने रोते हुये इस जहान में
लेकिन हँसी बसी थी मेरे जहनो-जान में
हँसना हँसाना जब हमारा धर्म बन गया
तो लोग बुलाने लगे हिन्दूस्तान में


'दिनेश बावरा'





कृष्ण की बंसुरिया पे नर नार झुमते थे
नन्द जी का बेटा सबका दुलारा हो गया

घर छोड़ पति छोड़ और सन्तान छोड़
गोपियों का रोम रोम श्याम प्यारा हो गया

लोकलाज छोड़ कर श्याम संग रास किया
गोकुल का लाल सबका सहारा हो गया

कृष्ण के विरह में गोपियों के आसुंओ से
ब्रजभूमि सारा जल खारा खारा हो गया

'राजेश चेतन'
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