Sunday, June 7, 2009

दिल्ली मेडिकल एसोशियसन

दिल्ली मेडिकल एसोशियसन द्वारा दरियागंज के सभागार में एक हास्य
कवि सम्मेलन का आयोजन कवि डा॰ टी॰ एस॰ दराल के संचालन मे किया गया।


प्रस्तुत कवि सम्मेलन की एक झलक-



रोज दे के उसको प्रपोज किया यार मैने,
तब से तो रोज रोज रोज दे रहा हूँ मैं ॥
मुरझाई प्यार की लता न पल्लवित हुई,
यूरिया में डोज ग्लूकोज दे रहा हूँ मैं॥

- कवि बृजेश द्विवेदी

गाँधी नेहरु ने देश बचाया वो ही असली नेता थे।
तो क्या शेखर बोस भगत केवल बस अभिनेता थे॥
उनको फूल चढ़ाये तुमने जो सत्ता के ग्राहक थे।
उनको जाने क्यू भूल गये जो आजादी के वाहक थे॥

- कवि कुलदीप ललकार






जात - धर्म के नाम पे, भाई-भाई को मार,
मानव-धर्म भूल रहा, ये वहसी संसार,
मंदिर, मस्जिद, गुरद्वार, माँगे सभी मुराद,
मैं माँगू संसार में, शाँति का प्रसाद,

- कवि टी॰ एस॰ दराल
लोकसभा चुनाव का अंजाम देखिए
यूपीए की जीत का सम्मान देखीए
राहूल जी का चल गया शबाब देखीए
अडवानी जी का टूट गया ख्वाब देखीए
लालू जी भी आ गये ON ROAD देखीए
उठ बैठता है किस ओर देखीए

- कवि हरमिन्द्र पाल


एक ने दूजे को बताया
तेरी बीवी को सांप ने काट खाया
पहला बोला इस सांप ने कइयों को काट खाया होगा
और मौत के घाट पहूँचाया होगा
अब कंठी हो गई होगी इसकी खाली
मेरी बीवी से जहर मरवाने आया होगा।

- कवियित्री बलजीत 'तन्हा'



पालतू आदमी की होती है बस यही पहचान,
गले में स्वर्ण माला, दायें हाथ की "तीसरी ऊँगली में स्वर्ण मुद्रिका,
होठों पे झूठी मुस्कान,
उसके सिर पर सींघ नही होते,
न होती है उसकी पूँछ,
उसकी पहचान होती है, चेहरे पर लगी…
एक नन्ही सी मूँछ!

- कवि नीरज मलिक





"मैं फूल ले के चला
वो त्रिशूल ले के आ गये
रोमेंटिक क्लाईमेट था, मैं भी अपटूडेट था
उस दिन तो सारा मामला भी सेट था
मेरे प्रेम की अमर ज्योति को बुझा गये॥"

- कवि अनीश भोला




एक बार जिसके मुँ ह लग जाता हूँ
उसके रोम - रोम में विष का संचार कर जात हूँ
मुझे खाने वाला नही करता,
किसी कि जी-हजूरी और जय-जयकार,
राजाओं का राजा मेरा नाम है - राज दरबार
एक-एक बाद -एक, एक के बाद एक
नही आता खाने वाला, मुझे खाने से बाज
और एक दिन दुनिया मे वो जाता है लाईलाज,

- कवि स्पर्श जैन





जहाँ कहीं भी नई रोशनी छाई है
जहां कही भी जीवन की सच्चाई है
दुनिया वाले चाहें उसको धर्म कहें
सच कहता हूँ भारत की परछाई है


- कवि राजेश चेतन
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