Friday, October 3, 2008

रामधारी सिंह दिनकर स्मृति कवि सम्मेलन


नई दिल्ली, जासं : मुठभेड़ में शहीद इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा की देश के नाम शहादत और राजनैतिक दलों द्वारा की जाने वाली राजनीति पर राजधानी के कई कवियों की पीड़ा मंगलवार को एक सम्मेलन में झलक उठी। कवि सम्मेलन श्री पुरुषोत्तम हिंदी भवन न्यास समित की ओर से आईटीओ स्थित हिंदी भवन में किया गया था।

इस मौके पर देश के जाने-माने कवि कृष्ण मित्र ने अपनी कविता के जरिए राजनीतिज्ञों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि 'लोग मरते रहे खून बहता रहा, बेबसी की कथा देश कहता रहा, और वे सांत्वना की रटी पंक्तियां, पत्रकारों के सम्मुख सुनाते रहे, बेशरम रहनुमाओं से उम्मीद क्या, जो अंधेरों में तरकश चलाते रहे।' श्री मित्र कवि रामधारी सिंह 'दिनकर' की जन्मशती पर आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन के दौरान कविता पाठ कर रहे थे।

कवि राजेश चेतन ने स्व. रामधारी सिंह 'दिनकर' के बारे में कहा कि 'सच्चे स्वाभिमानी 'दिनकर', राष्ट्रधर्म की वाणी दिनकर, भारत मां की हर पीड़ा को गाते फिरे जुबानी दिनकर, राजनीति के संघर्षो में हार कभी न मानीं 'दिनकर', इतने निश्छल इतने पावन ज्यों गंगा का पानी दिनकर, छह दशकों के कुल जीवन में रच गए अमर कहानी दिनकर।' कवि सम्मेलन में झांसी से आए कवि मदन गोपाल बिरथरे ने देशभक्ति पैदा करने वाली कविता लिखने की प्रेरणा देते हुए कहा कि 'खिलते हों पुष्प जहां हर एक धर्म वाले, ऐसा अनुदार हर बाग होना चाहिए, मंत्रमुग्ध करता हो बिना भेदभाव के जो सनातनी, ऐसा अनुराग होना चाहिए, सिंह के समान मेरी भारती के बेटों सुनो, आंचल में मां के नहीं दाग होना चाहिए, राष्ट्रमयी धर्ममयी हाथ में कृपाण दे दे, ऐसी कविता में आग होना चाहिए।' प्रसिद्ध कवि उदय प्रताप सिंह ने अपनी कविता हर तरफ चुनौतियों का जाल है, जलाल है, सावधान लेखनी कहां तेरा ख्याल है .. के माध्यम से वर्तमान परिदृश्य की रेखा खींची। सम्मेलन में फिरोजाबाद से आए कवि यशपाल, विनीत चौहान, सोम चौधरी, गजेंद्र सोलंकी ने भी कविता पाठ किया।
साभार दैनिक जागरण 24 सितम्बर 08
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