Sunday, January 20, 2008

अग्रवाल समाज नोएडा का कवि सम्मेलन

सेक्टर 33, अग्रवाल समाज नोएडा ने एक बहुत ही भव्य अग्रसेन भवन का निर्माण किया है, इस भवन के उदघाटन अवसर पर राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस समारोह में अतिथि के रूप में सांसद श्री अशोक प्रधान तथा प्रियागोल्ड बिस्कुट के प्रबन्ध निदेशक श्री बी पी अग्रवाल उपस्थित थे। कार्यक्रम के संयोजक श्री महिम मित्तल ने सभी आगंतुकों का स्वागत किया। कवि श्री गजेन्द्र सोलंकी के संयोजन में देर रात्रि तक चलने वाले कवि सम्मेलन में कवियों के स्वर कुछ यूं गूंजे -

कोई चीखा है तो उसने
बड़ी तड़पन सही होगी
कोई यूं ही नहीं चुभता
कहीं टूटन रही होगी
किसी को सिर्फ पत्थर-
दिल समझकर छोड़ने वालों
टटोलो तो सही उस दिल में
इक धड़कन रही होगी
चिराग जैन

किसी गीता से न कुरआं से अदा होती है
न बादशाहों की दौलत से अता होती है
रहमतें सिर्फ़ बरसती हैं उन्हीं लोगों पर
जिनके दामन में बुजुर्गों की दुआ होती है।
डा॰ सुनील जोगी




सोनिया गांधी ने मनमोहन जी
के मोबाइल पे फोन लगाया
तो उनके मोबाइल ने
सोनिया के लिए गीत गाया
"जो तुमको हो पसंद
वही बात कहेंगें।"
सरदार मनजीत सिंह




बनेगी बात नई सोच बदल के देखो
झोंपड़ी में रहो पर ख्वाब महल के देखो
खुलेंगी खिड़कियाँ और आसमां अपना होगा
ज़रा हिम्मत करो और घर से निकल के देखो
डा॰ विष्णु सक्सेना



कुत्ते को घूमाना याद रहा
और गाय की रोटी भूल गए
पार्लर का रास्ता याद रहा
और लंबी चोटी भूल गए
दोस्त यार सब याद रहे
और सगे भाई को भूल गए
साली का जन्मदिन याद रहा
माँ की दवाई भूल गए
पण्डित ओम व्यास 'ओम'

साई इस संसार में, ऐसे मिले फकीर
भीरत से लादेन है, बाहर दिखें कबीर।

सीमा पर होते नहीं,अगर जवान शहीद
मना नहीं सकते कभी, तीज, दिवाली, ईद।
डा॰ सुरेश अवस्थी


उन आंखों की दो बूंदो से सातों सागर हारे हैं
जब मेहंदी वाले हाथों ने मंगलसुत्र उतारे हैं
जब बेटे की अर्थी आई होगी घर के आंगन में
शायद दूध उतर आया हो उस दिन मां के दामन में
हरिओम पंवार



उदर की ज्वाला दिल तक पहुंचे
तब-तब कविता होती है,
जख्म से चोटें जब-जब उभरे
तब-तब कविता होती है।
तुम पहचानो या ना जानो
पर मैं ये कह सकता हूँ,
नयन से अश्रु हिल मिल जायें
तब-तब कविता होती है।
महिम मित्तल


मन में सेवा भाव जगे क्या राज है
कानों में भारत माँ की आवाज है
ओरों के कष्टों में आंखें गीली जब
समझो द्वारे अग्रसैन महाराज है
राजेश चेतन
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