Wednesday, July 28, 2010




नई दिल्ली, 27 जुलाई। राजधानी दिल्ली का हिन्दी भवन मंगलवार की शाम हिन्दी की वाचिक परंपरा की कविता का उत्सव स्थल था। हिन्दी भवन और राष्ट्रीय कवि संगम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाली मासिक गोष्ठी का इस बार विषय रहा- ‘हास्य कविता’। कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय कवि संगम के अध्यक्ष श्री जगदीश मित्तल ने की। विषय पर व्याख्यान देने के लिए मंच के जाने-माने हस्ताक्षर श्री अरुण जैमिनी, डॉ. प्रवीण शुक्ला तथा डॉ.विनय विश्वास मौजूद थे। डॉ. शुक्ला ने विषय की स्थापना की। उन्होंने ‘हास्यचूडामणि’ तथा ‘धूर्तोपाख्यान’ जैसे ग्रंथों का ज़िक्र करते हुए हास्य कविता के इतिहास पर प्रकाश डाला और वर्तमान हास्य कविता के परिदृश्य की ओर इंगित करते हुए कहा कि तालियों का छद्म मोह किसी भी कवि को पथभ्रष्ट कर सकता है। कविता की मर्यादा की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि हमें हास और उपहास का अंतर समझना चाहिए। श्री शुक्ला ने इस बात पर भी बल दिया कि हास्य का अर्थ फूहड़ता, या अश्लीलता नहीं है।
विषय को आगे बढ़ाते हुए डॉ. विनय विश्वास ने बहुत संक्षिप्त में हास्य की गरिमा और संवेदना को बचाए रखने की वक़ालत की। उन्होंने महर्षि बाल्मीकि का उदाहरण देते हुए कहा कि कवि को कभी नहीं पता होता कि वह जो लिखने जा रहा है, उसका स्वरूप क्या होगा, वह तो केवल अनुभूत को अभिव्यक्त करता है, बाद में विद्वत समाज इस बात का आकलन करता है कि अमुक कृति को किस वर्ग में रखा जाए।
श्री अरुण जैमिनी ने अपने वक्तव्य में यह बात स्वीकार की कि हास्य का इतिहास बहुत लंबा नहीं है। समय के साथ हास्य के प्रतिमान बदले हैं। उन्होंने कविता की संवेदना की बात करते हुए कहा कि कविता चाहे कोई भी हो उसका जन्म सदैव करुणा से ही होता है, और यह बात हास्य रस पर भी पूरी तरह लागू होती है। इसके साथ ही उन्होंने बड़े ही साधारण शब्दों में यह भी कहा कि जब कोई अनापेक्षित बात हो जाए तो हास्य का जन्म होता है।
वक्तव्य के बाद नवांकुरों की जिज्ञासाओं के उत्तर तथा उनकी कविताओं पर टिप्पणी का सत्र चला। सर्व श्री अनिल गोयल, डॉ. टी एस दराल, नागेश चन्द्रा, राजेश गर्ग, रोहित चौधरी, राजकमल घायल तथा प्रदीप जैन ने अपनी रचनाएँ पढ़ीं तथा वरिष्ठ कवियों ने उन पर टिप्पणी की।
वरिष्ठ कवियों के काव्यपाठ स्वरूप सुश्री शालिनी सरगम, डॉ.विनय विश्वास, डॉ. प्रवीण शुक्ल तथा श्री अरुण जैमिनी ने अपनी कविताएँ पढ़ीं।
अध्यक्ष श्री जगदीश मित्तल ने वक्ताओं के सारगर्भित व्याख्यान के लिए उन्हें बधाई दी तथा इस बात पर हर्ष व्यक्त किया कि राष्ट्रीय कवि संगम अपने अपेक्षित लक्ष्य की ओर तीव्रता से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि कविता की नई पीढ़ी की तलाश का जो सपना हमने देखा था, वह अब साकार होता दिखाई दे रहा है।
चर्चा सत्र के उपरांत राष्ट्रीय कवि संगम के महामंत्री श्री राजेश चेतन ने संस्था की गतिविधियों की सूचना दी तथा धन्यवाद ज्ञापन किया।
युवा कवि चिराग़ जैन ने गोष्ठी का सफल संचालन किया।
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