Saturday, January 9, 2010

दिल्ली में दो दिन चला देश भर के कवियों का महाकुंभ

सन 2010 की 2-3 जनवरी। घना कोहरा, धुंध और ठिठुराती सर्दी। दिल्ली के सुप्रसिद्ध छतरपुर मंदिर के बगल में अध्यात्म साधना केंद्र। प्रतिकूल मौसम की सभी चुनौतियों को धता बताते हुए उमड़े चले आ रहे थे -सुदूर दक्षिण से लेकर जम्मू-कश्मीर की वादियों से असम शिलांग से लेकर गुजरात तक से, राष्ट्रीयता की ऊर्जा और उष्मा से प्रदीप्त सैकड़ों कविगण। लक्ष्य - राष्ट्रीय कवि-संगम का दूसरा राष्ट्रीय अधिवेशन।


कवि संगम की शुरुआत हुई थी ढाई वर्ष पहले वाल्मिकी जयन्ती 2007 में। मूल प्रेरणा थी राष्ट्रीयता का जागरण। स्वप्न द्रष्टा थे श्री इन्द्रेश जी। शिल्पकार थे श्री जगदीश मित्तल जी और संवाहक थे देश के अनेक ख्यातनाम कविगण। एक बार फिर से आ जुटे थे लगभग 400 कवि अपनी नाभि में राष्ट्रीयता की कस्तूरी संजोए, देश की गहरी चिंताओ और सरोकारों से उद्वेलित, देश की शक्ति और सामर्थ्य से सुपरिचित तथा देश का स्वर्णिम भविष्य गढ़ने को लालायित।



उदघाटन- सत्र को महिमामंडित किया रा॰ स्व॰ संघ॰ के पूर्व सरसंघचालक श्री सुदर्शन जी ने तथा जैन आचार्य महाप्रज्ञ जी के प्रतिनिधि पूज्य शासन गौरव मुनि श्री तारा चन्द जी ने। इस सत्र में आचार्य महाप्रज्ञ की एक काव्यकृति अनुभव के बोल तथा देश भर के कवियों की निर्देशिका का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर श्री सुदर्शन जी ने कहा कि कालचक्र में पड़कर उत्थान पतन के दौर से गुजरती हुई भारतीय संस्कृति के पुनरुत्थान का युग 2011 से पुन: आरंभ होने वाला है। इसके समर्थ संवाहक बनने का श्रेय राष्ट्रीयता के प्रखर प्रणेताओं को सहज रुप से मिलने वाला है। इस नाते उन्होने राष्ट्रीय कवि संगम के कवियों को आगे बढ़कर शंखनाद करने का आह्वान किया। सत्र संचालन कवि संगम के सहसंयोजक श्री राजेश चेतन ने किया।



संस्था के मार्गदर्शक इन्द्रेश जी ने उदघाटन वक्तव्य में कवियों को संबोधित करते हुए कहा कि साहित्य समाज का दर्पण ही नही अपने युग का दीपक भी होता है। अपने युग के यथार्थ को समझते हुए समाज के मार्गदर्शन की जिम्मेवारी भी उसी पर होती है। राष्ट्ररक्षा अभियान का कवि एक विवेक शील सिपाही होता है जो अपनी कलम रुपी तलवार से राष्ट्रविरोधी प्रवृतियों का संहार कर सकता है। उनके वक्तव्य का सार यही था-



जो वक्त की आंधी से खबरदार नहीं है। कुछ और ही होगा, कलमकार नहीं है।



राष्ट्रीय कवि संगम के इस प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कहा की कवि युगदृष्टा होता है, और वह राष्ट्र की समस्यायों का समाधान राष्ट्र के सामने प्रस्तुत करता है। वह अपने समय समाज और देश के लिए मशाल काम करता है। कवि संगम द्वारा देश के कवियों को एक मंचपर लाने प्रयास सराहनीय है। इस अवसर पर श्याम जाजू, डा॰ नन्दकिशोर गर्ग, श्री रविन्द्र बंसल विधायक, पूर्व महापौर श्री महेश शर्मा सहित अनेक राजनैतिक हस्तियां मौजूद थी।

प्रख्यात हास्य कवि सुरेन्द्र शर्मा ने कविता का भविष्य और भविष्य की कविता पर चर्चा करते हुए कहा कि वास्तविक कविता वही है जो आम आदमी के जीवन से जुड़ती हो। उनकी बेबाक अभिव्यक्ति से कवियों को अनूठी प्रेरणा मिली। कृष्णमित्र ने राष्ट्रीयता को कविता का प्राण तत्व कहा जिस कविता में राष्ट्र व समाज कल्याण की भावना ना हो उसे कविता नही कहा जा सकता । डा॰ कुँवर बेचैन, राजगोपाल सिंह, लक्ष्मीशंकर वाजपेयी, नरेश शांडिल्य ने कहा कविता में शिल्प के बजाय भाव पक्ष का अधिक महत्व होता है शिल्प के प्रति अत्यधिक आग्रह संवेदना की हत्या कर देता है।



राष्ट्रीय कवि संगम के राष्ट्रीय संयोजक जगदीश मित्तल ने स्मरण कराया कि कविता हम नही लिखते हमसे माँ सरस्वती लिखवाती है हम कुछ ऐसा लिख जायें जिससे आने वाली पीढ़ियां प्रेरणा ले। वर्तमान परिदृश्य में कविता की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दुनिया के जिसजिस देश की कविता समृद्ध है उसने क्रांति करने की पहल की है राष्ट्रीय कवि संगम भी राष्ट्र जागरण क्रांति का अग्रदूत बनेगा।


प्रताप फौजदार की ओजस्वी कविता सच है देश भक्ति लौ पर बलिदान पतंगा होता है मृत्यु भयभीत नही करती जब हाथ तिरंगा होता है वरिष्ठ ओज कवि श्री कृष्ण मित्र की उँचा रखना भारत माँ की शान को बलवीर सिंह करुण की भारत माता की जय सुनकर जिसकी छाती फट जाती हो बोलो वह गद्दार नही तो क्या होगा, नरेश नाज की मेरा तुमसे एक गीत का वादा है, रविन्द्र शुक्ल की अंधियारों को पूज रहे सब दीपक दूर खड़ा रोता है, जन विवेक फिर भी सोता है कमलेश मौर्य मृदु की जिस दिन राष्ट्रीयता की पहचान हेत वन्देमातरम मानदण्ड बन जायेगा उस दिन भारत अखण्ड बन जायेगा पंक्तियों और बाँकेलाल जी की सरस्वती वन्दना ने उपस्थित कवियों को प्रेरित किया।


रात 3:30 बजे तक अधिवेशन परिसर में देश भर से आये 400 कवियों ने कविता पाठ किया। सभी उदीयमान नवांकुरो से लेकर सिद्ध कवियों ने अंत तक बैठकर एकदूसरे को सुना, सराहा और महसूस किया कि अलगअलग मातृभाषा धर्म के होते हुए भी सबकी भावधारा और अधिकांश चिंताएं सांझी हैं किंतु अभिव्यक्ति के रंग और तेवर विविधता पूर्ण हैं। विभिन्न सत्रों का संचालन गजेन्द्र सोलंकी, अशोक बत्रा, चिराग जैन, प्रवीण शुक्ल, नील, कृष्ण गोपाल विद्यार्थी, अम्बर खरबन्दा, ने सुचारु रुप से किया।

इस अवसर पर देश के तीन कवियों मुम्बई के अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त बाबा सत्यनारायण मौर्य को वाल्मिकी सम्मान, मैनपुरी के दीन मुहम्मद दीन को रसखान सम्मान तथा मध्य प्रदेश की डा॰ मनोरमा मिश्र को मीराबाई सम्मान से अलंकृत कर सम्मानित किया गया।



सूर्या रोशनी के जयप्रकाश अग्रवाल, ए॰ पी॰ आई॰ ग्रुप के सत्य भूषण जैन, माइक्रोन ग्रुप के आर॰ के॰ अग्रवाल, पीयूष ग्रुप के अमित गोयल तथा अग्रवाल पैकर्स मूवर्स के रमेश अग्रवाल जैसे प्रसिद्ध उद्योगपतियों एवं प्रसिद्ध कथाकार अजय भाई की उपस्थिति भी कार्यक्रम की गरिमा बढ़ा रही थी। कार्यक्रम के समापन पर अणुव्रत न्यास के सम्पत मल नाहाटा कवि संगम के कोषाध्यक्ष स्वदेश जैन, रोशन कंसल शम्भू शिखर एवं राजेश पथिक ने अतिथियों का धन्यवाद किया।


जगदीश मित्तल (राष्ट्रीय संयोजक) राष्ट्रीय कवि संगम

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