Saturday, November 22, 2008

नयी प्रतिभाओं की संभावना तलाशती एक दिशा


हम हृदय से कर रहे हैं माँ तुम्हारी आरती- ये स्वर था नयी पीढ़ी के उन पन्द्रह रचनाकारों का, जिन्हें देश के विविध प्रान्तों से चुनकर दिशा फाउण्डेशन ने साहित्य समाज के सामने प्रस्तुत किया। हिन्दी कवि सम्मेलनों के मंचों पर नये तेवर के पन्द्रह नामों का आग़ाज़ था दिशा का यह प्रयास।
उल्लेखनीय है कि दिशा फाउण्डेशन प्रतिवर्ष 15 नवम्बर को पन्द्रह नये युवा कवियों को चुनकर एक काव्य-संध्या का आयोजन करती है, जिसमें देश के सुविख्यात और स्थापित कवि श्रोताओं की पंक्ति में बैठकर नये कवियों को सुनते हैं और उन्हें प्रोत्साहित करते हैं। गत 15 नवंबर को यही आयोजन एक बार फिर हिंदी जगत् में चर्चा का विषय रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत वीर चक्र विजेता कर्नल तेजेंद्र पाल त्यागी के ओजस्वी भाषण से हुई। जय हिंद और भारत माता की जय के नारों से पूरा हिंदी भवन गूंजा तो ऐसा गूंजा कि पूरे कार्यक्रम की धारा ही राष्ट्रभक्ति के रस से भर गई। सुविख्यात हास्य कवि जैमिनी हरियाणवी, ओज कवि कृष्णमित्र जी और तमाम गणमान्य व्यक्तियों ने युवा कवियों को सुना और सराहा।
युवा कवयित्री पद्मिनी शर्मा ने सरस्वती वंदना पढ़कर कवि सम्मेलन का आग़ाज़ किया। फिर कुमार वैभव ने माँ भारती की वन्दना की और माहौल को राष्ट्रीय चेतना के भाव से भर दिया। उनके गीत “सृष्टि तेरे रूप को है माँ स्वयं सिंगारती / मैं हृदय से कर रहा हूँ माँ तुम्हारी आरती” को श्रोताओं ने खूब सराहा। इसके पश्चात सौरभ भारद्वाज ने समसामयिक घटनाओं पर तंज़ करते हुए लोकतंत्र की वर्तमान हालत पर करारा व्यंग्य किया। पद्मिनि शर्मा ने स्कूली बच्चों के मनोभावों को अपने गीत का विषय बनाया, तो बबीता अग्रवाल ने कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुरीतियों पर प्रकाश डालते हुए सार्थक रचना पढ़ी। कुलदीप आज़ाद ने अपनी ग़ज़लों के माध्यम से संबंधों में बढ़ रही मतलब परस्ती पर प्रकाश डाला और जितेंद्र प्रीतम ने मन को छूते हुए संवेदनाओं से भरे शेर पढ़े। उनका ये शेर- “वो जिसके दायरे में साँस ना ले पाते हों रिश्ते / सज़ा है, चारदीवारी है वो आंगन नहीं होता” श्रोताओं ने दिल से सराहा।
कुमार पंकज का प्रेमगीत से माहौल में रूमानी रंग बिखेरे तो बलजीत तनहा, स्पर्श जैन, अनीश भोला और प्रबल पोद्दार ने हास्य की फुलझड़ियों से श्रोताओं को गुदगुदाने की सफल क़ोशिश की। शेखर अग्रवाल और मंच का संचालन कर रहे श्रीकांत श्री ने ओज की श्रेष्ठ रचनाओं से क्रांति की हिलोर पैदा की। इस अवसर पर पिछले वर्ष के पन्द्रह युवा कवियों की कविताओं का एक संकलन भी लोकार्पित किया गया। इस अवसर पर जगदीश मित्तल जी, रमेश अग्रवाल जी, रोशन कंसल जी, भूपेन्द्र कौशिक जी जैसी जानी मानी हस्तियाँ और सरिता शर्मा, वेद प्रकाश वेद, प्रवीण शुक्ला, रसिक गुप्ता, गजेंद्र सोलंकी, धर्मचंद अशेष, सतीष सागर जैसे जाने माने कवि भी मौजूद थे।कार्यक्रम के संयोजक राजेश चेतन और दिशा फाउण्डेशन की अध्यक्ष ॠतु गोयल ने बहुत बारीक़ी से कार्यक्रम को संजोया और बताया कि इस कार्यक्रम के माध्यम से उनका एकमात्र उद्देश्य नयी प्रतिभाओं को आगे लाना है, ताकि देश और समाज का अनवरत विकास हो सके।
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