Tuesday, February 26, 2008

पटना कवि सम्मेलन

दिनांक 23 फरवरी 08 को पटना में श्री चित्रगुप्त आदि मंदिर के सामने गंगा तट पर स्थित एस आई एस में एक विराट हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। राजेश चेतन के संचालन में स्थानीय सभागार में उपस्थित श्रोताओं ने कवितओं का आनन्द लिया। उपस्थित कवियों ने अपने अपने तेवर से कविताएं प्रस्तुत की -

देखा बाबा भगत सिंह जी खड़े हुये मेरे आगे।
उन्हें देख कर प्रश्न अनेकों मेरे अन्तर में जागे॥
मैंने पूछा झूम-झूम फांसी कैसे चढ़ जाते थे।
नंग़े पैर दहकते अंगारों पर भी बढ़ जाते थे॥
बोले देशभक्ति लौ पर बलिदान पतंगा होता है।
मृत्यु भयभीत नहीं करती जब हाथ तिरंगा होता है॥
प्रताप फौजदार, आगरा


हर बिगड़ी हुई वस्तु
रिपेयर की जाती है
कभी-कभी
कुछ पुर्जे खो जाते हैं
जो मिलते ही नहीं
तो बदल दिए जाते हैं
फिर कार्यारम्भ हो जाता है
मंत्र का अक्सर
लेकिन,
जीवन में
अनजाने में
गलती हो जाए अगर
तो जीवन इस तरह
बिखर जाता है
फिर कभी
उसका
'रिपेयर' हो
नहीं पाता।
कमलनयन श्रीवास्तव


मेहंदी, कुमकुम, रोली का त्यौहार नहीं होता
रक्षाबन्धन के चन्दन का प्यार नहीं होता
उसका आंगन एकदम सूना-सूना लगता है
जिसके घर में बेटी का अवतार नही होता
डा॰ सुनील जोगी, दिल्ली






भक्ति और विश्वास से, होते कितने काम।
'तुलसी' तुलसी हो गये, राम हो गये 'राम'॥
मस्जिद में गीता मिले, मंदिर में कुरान।
विश्वगुरु हो जायेगा, फिर से हिन्दुस्तान॥
डा॰ सुरेश अवस्थी कानपुर






जुग-जुग से कल-कल कर कहता
गंगा जमुना का पानी है
हों जाति-घर में सब भले अलग
पर ख़ून तो हिन्दुस्थानी है
गजेन्द्र सोलंकी, दिल्ली






दस्तक दे चुके सैलाब का, अब जोर बाकी है
मझधार से चली नाव का, अब ठौर बाकी है
सूरत बदलने का मिजाज अब हो चुका अनुपम
अन्धेरा छँट रहा इस रात का, अब भोर बाकी है
कुमार अनुपम






मात-पिता की आज्ञा का तो केवल एक बहाना था।
मातृभूमि की रक्षा करने प्रभु को वन में जाना था॥

बाल्मिकी रत्नाकर होते रामायण ना कह पाते
तुलसी पत्नी भक्ति में ही जीवन यापन कर जाते
रामानन्द ना सागर होते राम कथा ना दिखलाते
कलियुग में त्रेता झांकी के दर्शन कभी ना हो पाते
कवियों की वाणी को प्रभु ने धरती पर गुंजाना था
राजेश चेतन, दिल्ली
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